Monday, April 22, 2019

पाठ-10, नेताजी का चश्मा (क्षितिज भाग-2)


प्रश्न 1- सेनानी न होते हुए भी चश्मेवाले को लोग कैप्टन क्यों कहते थे?
उत्तर- सेनानी न होते हुए भी लोग चश्मेवाले को कैप्टेन इसलिए कहते थे क्योंकि नेताजी की बिना चश्मे की मूर्ति उसे दुख पहुँचाती थी इसलिए वह नेताजी की प्रतिमा को बार-बार चश्मा पहनाकर उनके प्रति अपनी अगाध श्रद्‌धा प्रकट करता था। उसमें देशप्रेम एवं देशभक्ति का भाव कूट-कूटकर भरा था। देश के प्रति समर्पण की भावना उसके हृदय में किसी फ़ौजी से कम नहीं थी। चाहे लोगों ने उसे यह नाम व्यंग्य में दिया था पर उस पर ठीक लगता है।
प्रश्न 2- हालदार साहब ने ड्राइवर को पहले चौराहे पर गाड़ी रोकने के लिए मना किया था लेकिन बाद में तुरंत रोकने को कहा-
(क) हालदार साहब पहले मायूस क्यों हो गए थे?
(ख) मूर्ति पर सरकंडे का चश्मा क्या उम्मीद जगाता है?
(ग) हालदार साहब इतनी-सी बात पर भावुक क्यों हो उठे?
उत्तर-
(क) हालदार साहब इसलिए मायूस हो गए थे क्योंकि वे सोच रहे थे कि कस्बे के चौराहे पर नेताजी की मूर्ति तो होगी पर उसकी आँखों पर चश्मा नहीं होगा क्योंकि मास्टर बनाना भूल गया और चश्मा लगाने वाला देशभक्त कैप्टेन तो मर चुका है। वहाँ अब किसी में कैप्टेन जैसी देशप्रेम की भावना नहीं है।
(ख) मूर्ति पर सरकंडे का चश्मा यह उम्मीद जगाता है कि अभी लोगों में देशभक्ति एवं स्वतंत्रता सेनानियों के लिए सम्मान की भावना मरी नहीं है। भावी पीढ़ी इस धरोहर को सँभाले हुए है। बच्चों के अंदर देशप्रेम का जज़्बा है, उनमें राष्ट्र प्रेम के बीज अंकुरित हो रहे हैं। अतः देश का भविष्य सुरक्षित है, उज्ज्वल, है।
(ग) हालदार साहब सोच रहे थे कि कैप्टन के न रहने से नेताजी की मूर्ति चश्माविहीन होगी परंतु जब उन्होंने यह देखा कि मूर्ति की आँखों पर सरकंडे का चश्मा लगा हुआ है तो उनकी निराशा आशा में बदल गई। उन्होंने समझ लिया कि युवा पीढ़ी में देशप्रेम और देशभक्ति की भावना है, जो देश के लिए शुभ संकेत है। यह बात सोचकर वे भावुक हो गए और उनके ह्रदय की प्रसन्नता आँखों से आँसू बनकर छलक उठी।

प्रश्न 3.- आशय स्पष्ट कीजिए
‘‘बार-बार सोचते, क्या होगा उस कौम का जो अपने देश की खातिर घर-गृहस्थी-जवानी-जिंदगी सब कुछ होम देनेवालों पर भी हँसती है और अपने लिए बिकने के मौके ढूँढ़ती है।
उत्तर- उक्त पंक्ति का आशय यह है कि बहुत से लोगों ने देश के लिए अपना सब कुछ बलिदान कर दिया पर कुछ लोग उनके बलिदान की प्रशंसा न करके ऐसे देशभक्तों का उपहास उड़ाते हैं। लोगों में देशभक्ति की ऐसी घटती भावना निश्चित रूप से निंदनीय है। ऐसे लोग इस हद तक स्वार्थी होते हैं कि उनके लिए अपना स्वार्थ ही सर्वोपरि होता है। वे अपने स्वार्थ की सिद्धि के लिए देशद्रोह करने तक को तैयार रहते हैं।

प्रश्न 4.- पानवाले का एक रेखाचित्र प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर- पानवाला अपनी पान की दुकान पर बैठा ग्राहकों को पान देने के अलावा उनसे कुछ बातें करता रहता है। वह स्वभाव से खुशमिज़ाज, दिखने में काला और मोटा व्यक्ति है। उसकी तोंद निकली हुई है। वह हर समय पान खाता रहता है, जिससे उसकी बत्तीसी लाल-काली हो गई है। वह जब हँसता है तो उसकी तोंद थिरकने लगती है। वह वाकपटु है, जो व्यंग्यात्मक बातें कहने से भी नहीं चुकता है। वह भावुक इंसान भी था तथा उसे अपने आस-पास की घटनाओं की घटनाओं की जानकारी रहती थी।

प्रश्न 5.- “वो लँगड़ा क्या जाएगा फ़ौज में। पागल है पागल!” कैप्टन के प्रति पानवाले की इस टिप्पणी पर अपनी प्रतिक्रिया लिखिए।
उत्तर- “वह लँगड़ा क्या जाएगा फ़ौज में। पागल है पागल !” यह टिप्पणी कैप्टन के बारे में हालदार साहब द्वारा पूछे जाने पर पानवाले द्वारा कई गई थी, जो बिलकुल उचित नहीं थी। पानवाला चश्मेवाले को महत्वहीन इंसान समझता था। कैप्टन शारीरिक रूप से अक्षम था इसलिए वह फौज में नहीं जा सकता था। कैप्टन इस तरह की उपेक्षा का पात्र नहीं है। उसका इस तरह मज़ाक उड़ाना उचित नहीं है। वास्तव में कैप्टन उपहास का नहीं सम्मान का पात्र है, जो अपने सीमित संसाधनों से नेताजी की मूर्ति पर चश्मा लगाकर देशप्रेम का प्रदर्शन करता है़। पानवाला उसे पागल कहता था। ऐसा कहना पानवाले की स्वार्थपरता की भावना को दर्शाता है, जो सर्वथा अनुचित है।

रचना और अभिव्यक्ति
प्रश्न 6- निम्नलिखित वाक्य पात्रों की कौन-सी विशेषता की ओर संकेत करते हैं
(क) हालदार साहब हमेशा चौराहे पर रुकते और नेताजी को निहारते।
(ख) पानवाला उदास हो गया। उसने पीछे मुड़कर मुँह का पान नीचे थूका और सिर झुकाकर अपनी धोती के सिरे से आँखें पोंछता हुए बोला–साहब! कैप्टन मर गया।
(ग) कैप्टन बार-बारे मूर्ति पर चश्मा लगा देता था।
उत्तर-
(क) हालदार साहब अपने कर्म के प्रति सजग तथा पान खाने के शौकीन थे। उनके मन में शहीदों और देशभक्तों के प्रति आदर की भावना थी। नेताजी की मूर्ति को रुककर ध्यान से देखना तथा चश्माविहीन मूर्ति को देखकर आहत होना इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है। नेताजी को पहनाए गए चश्मे के माध्यम से वे कैप्टन की देशभक्ति को देखकर खुश होते थे और उसके लिए उनके मन में श्रद्धा थी। वे चाहते हैं कि युवा पीढ़ी में यह भावना और भी प्रबल हो।
(ख) पानवाला प्रायः कैप्टन चश्मेवाले का उपहास उड़ाया करता था, जिससे ऐसा लगता था कि उसके अंदर देशभक्ति का भाव नहीं है पर जब कैप्टन मर जाता है, तब उसके देशप्रेम की झलक मिलती है। वह कैप्टन जैसे व्यक्ति की मृत्यु से दुखी होकर हालदार को उसकी मृत्यु की सूचना देता है। पानवाले के ह्रदय में कैप्टन के प्रति गहरी आत्मीयता की भावना थी। कहीं-न-कहीं उसके मन में भी कैप्टन की देशभक्ति के लिए श्रद्धा थी, जिस कारण कैप्टन के मर जाने पर वह दुखी हो गया। इस घटना से पानवाले की संवेदनशीलता और देशप्रेम की भावना का पता चलता है।
(ग) कैप्टने भले ही शारीरिक रूप से फ़ौजी व्यक्तित्व वाला न रही हो पर मानसिक रूप से वह फ़ौजियों जैसी ही मनोभावना रखता था। उसके हृदय में देश प्रेम और देशभक्ति की भावना कूट-कूटकर भरी थी। नेताजी की चश्माविहीन मूर्ति देखकर वह आहत होता था और उस कमी को पूरा करने के लिए अपने सीमित संसाधनों से भी चश्मा लगा दिया करता था ताकि नेताजी का व्यक्तित्व अधूरा न दिखे।

प्रश्न 7- जब तक हालदार साहब ने कैप्टन को साक्षात देखा नहीं था तब तक उनके मानस पटल पर उसका कौन-सा चित्र रहा होगा, अपनी कल्पना से लिखिए।
उत्तर- जब तक हालदार साहब ने कैप्टन को साक्षात नहीं देखा था, तब तक उनके मानस पटल पर कैप्टन का व्यक्तित्व एक फ़ौजी व्यक्ति जैसा रहा होगा। जो लंबे कदवाला, मजबूत कद-काठी वाला हट्टा-कट्टा दिखता होगा। उसका चेहरा रोबीला होगा। वह अवश्य ही नेताजी की फ़ौज का सिपाही रहा होगा इसी कारण लोग उसे कैप्टन कहते हैं।

प्रश्न 8.- कस्बों, शहरों, महानगरों के चौराहों पर किसी न किसी क्षेत्र के प्रसिद्ध व्यक्ति की मूर्ति लगाने का प्रचलन-सा हो गया है
(क) इस तरह की मूर्ति लगाने के क्या उद्देश्य हो सकते हैं?
(ख) आप अपने इलाके के चौराहे पर किस व्यक्ति की मूर्ति स्थापित करवाना चाहेंगे और क्यों ?
(ग) उस मूर्ति के प्रति आपके एवं दूसरे लोगों के क्या उत्तरदायित्व होने चाहिए?
उत्तर- (क) समाज सेवा, देश सेवा या ऐसे ही अन्य क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले प्रसिद्ध व्यक्तियों की मूर्ति प्रायः कस्बों, चौराहों, महानगरों या शहरों में लगाई जाती हैं। ऐसी मूर्तियाँ लगाने का उद्देश्य सजावटी न होकर उद्देश्यपूर्ण होता है ताकि लोग उनके कार्यों को जाने तथा उनसे प्रेरित हो। लोगों में अच्छे कार्य करने की रुचि उत्पन्न हों और वे उसके लिए प्रेरित हों। लोग ऐसे लोगों को भूलें न तथा उनकी चर्चा करते हुए युवा पीढ़ी को भी उनसे परिचित कराएँ।
(ख) मैं अपने इलाके के चौराहे पर चंद्रशेखर आज़ाद की प्रतिमा लगवाना चाहूँगा ताकि लोगों विशेषकर युवावर्ग को अपने देश के लिए कुछ कर गुज़रने की प्रेरणा मिले। वे अपनी मातृभूमि पर आँच न आने दें और अपने जीते जी देश को ग़ुलाम होने से बचाने के लिए अपने प्राणों की बाजी लगाने से भी न हिचकिचाएँ। इसके अलावा युवाओं में देश-प्रेम और देशभक्ति की भावना बलवती रहे।
**आप अपनी सोच के अनुसार इस तरह के उत्तर बना सकते हैं।
(ग) चौराहे या कस्बे में लगी समाज सेवी या अन्य उत्कृष्ट कार्य करने वाले व्यक्ति की प्रतिमा के प्रति हमारा तथा अन्य लोगों का यह उत्तरदायित्व होना चाहिए कि हम मूर्ति एवं उसके आस-पास की साफ़-सफ़ाई का ध्यान रखें व उसे खंडित न होने दें। उस हस्ती के कार्यों की चर्चा की जाए तथा कार्यों की वर्तमान में प्रासंगिकता बताते हुए उनसे प्रेरित होने के लिए लोगों से कहें। मूर्ति के प्रति सम्मान भाव बनाए रखें।
प्रश्न 9- सीमा पर तैनात फ़ौजी ही देश-प्रेम का परिचय नहीं देते। हम सभी अपने दैनिक कार्यों में किसी न किसी रूप में। देश-प्रेम प्रकट करते हैं; जैसे-सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान न पहुँचाना, पर्यावरण संरक्षण आदि। अपने जीवन जगत से जुड़े ऐसे और कार्यों का उल्लेख कीजिए और उन पर अमल भी कीजिए।
उत्तर- सीमा पर तैनात फ़ौजी विशिष्ट रूप में देशप्रेम का परिचय देते हैं। उनका देशप्रेम अत्यंत उच्चकोटि का और अनुकरणीय होता है परंतु हम लोग भी विभिन्न कार्यों के माध्यम से देशप्रेम को प्रकट कर सकते हैं। ये काम हैं-सरकारी संपत्ति को क्षति न पहुँचाना, बढ़ते प्रदूषण को रोकने में मदद करना, अधिकाधिक वृक्ष लगाना, पर्यावरण तथा अपने आसपास की सफ़ाई रखना, पानी के स्रोतों को दूषित होने से बचाना, वर्षा जल का संरक्षण करना, बिजली की बचत करना, कूड़ा इधर-उधर न फेंकना, नदियों को प्रदूषण मुक्त बनाए रखने का प्रयास करना, तोड़-फोड़ न करना, शहीदों एवं देशभक्तों के प्रति सम्मान रखना, लोगों के साथ मिल-जुलकर रहना आदि।

प्रश्न 10- निम्नलिखित पंक्तियों में स्थानीय बोली का प्रभाव स्पष्ट दिखाई देता है, आप इन पंक्तियों को मानक हिंदी में लिखिए-
कोई गिराक आ गया समझो। उसको चौड़े चौखट चाहिए। तो कैप्टन किदर से लाएगा? तो उसको मूर्तिवाला दे दिया। उदर दूसरा बिठा दिया।
उत्तर- मान लो कोई ग्राहक आ गया। उसे चौड़ा फ्रेम चाहिए। तो कैप्टन कहाँ से लाएगा? तो उसे मूर्तिवाला फ्रेम दे देता है और मूर्ति पर दूसरा फ्रेम लगा देता है।

प्रश्न 11- ‘भई खूब! क्या आइडिया है। इस वाक्य को ध्यान में रखते हुए बताइए कि एक भाषा में दूसरी भाषा के शब्दों के आने से क्या लाभ होते हैं?
उत्तर- एक भाषा के शब्द जब दूसरी भाषा में आते हैं तो इससे भाषा की ग्रहण क्षमता बढ़ जाती है। भाषा सरल, सहज, बोधगम्य और अधिक आकर्षक बन जाती है एवं अधिकाधिक लोगों द्वारा प्रयोग और व्यवहार में लाई जाती है। कुछ ही समय में ये शब्द उसी भाषा में घुल-मिल जाते हैं।

अतिरिक्त प्रश्नोत्तर-
प्रश्न 1- जिस कस्बे में मूर्ति लगवाई जानी थी उसका संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
उत्तर- जिस कस्बे में नेताजी की मूर्ति लगवाई जानी थी, वह बहुत बड़ा नहीं था। वहाँ कुछ मकान पक्के थे। एक छोटा-सा बाज़ार था। वहीं, लड़के-लड़कियों का एक स्कूल, सीमेंट का एक छोटा कारखाना, दो ओपन एअर सिनेमाघर और नगरपालिका थी।

प्रश्न 2- मूर्ति बनवाने का कार्य स्थानीय ड्राइंग मास्टर को क्यों सौंपना पड़ा?
उत्तर- मूर्ति बनवाने का कार्य स्थानीय ड्राइंग मास्टर को इसलिए सौंपना पड़ा क्योंकि अधिकारी ने फाइलों और मूर्ति संबंधी अन्य बातों के निर्णय में बहुत अधिक समय ले लिया और उपलब्ध बजट भी अधिक नहीं था। ये अधिकारी अपना कार्यकाल समाप्त होने से पहले ही मूर्ति बनवाने का काम कर लेना चाहते थे इसलिए जल्दबाज़ी में इसे स्थानीय ड्राइंग मास्टर को सौंप दिया।

प्रश्न 3- नेताजी की मूर्ति का संक्षिप्त चित्रण कीजिए।
उत्तर- कस्बे की हृदयस्थली के चौराहे पर नेताजी की जो मूर्ति लगाई गई थी वह टोपी की नोक से कोट के दूसरे बटन तक दो फुट ऊँची थी। संगमरमर की बनी इस मूर्ति में नेताजी सुंदर लग रहे थे। उन्हें देखते ही उनके नारे तुम मुझे…तथा दिल्ली चलो...याद आने लगते थे।

प्रश्न 4- ‘नेताजी का चश्मा’ पाठ के माध्यम से लेखक ने क्या संदेश देने का प्रयास किया है?
उत्तर- ‘नेताजी का चश्मा’ नामक पाठ के माध्यम से लेखक ने यह संदेश दिया है कि देशभक्ति एवं शहीदों का सम्मान करने की भावना सभी में होनी चाहिए विशेषकर युवा पीढ़ी में। देशभक्ति का प्रदर्शन देश के सभी नागरिक चाहे वह छोटा हो या बड़ा, साधारण हो या विशेष अपने-अपने ढंग से देशहित के कार्य-व्यवहार से कर सकते हैं।
प्रश्न 5- पाठ ‘नेताजी का चश्मा’ शीर्षक की सार्थकता सिद्ध कीजिए।
उत्तर- कहानी में आरंभ से अंत तक नेताजी सुभाषचंद्र बोस व उनका चश्मा साथ-साथ चलते हैं। चौराहे पर नेताजी की चश्माविहीन मूर्ति स्थापित होना, कैप्टन द्वारा मूर्ति को रोज़ कोई-न-कोई चश्मा पहनाना, उसकी मृत्यु के बाद मूर्ति पर सरकंडे का चश्मा दिखना। हालदार साहब, कैप्टन चश्मेवाला, पानवाला, इन तीनों पात्रों का चरित्र भी कहानी के साथ-साथ स्पष्ट होता जाता है। अत: कहानी का शीर्षक ‘नेताजी का चश्मा’ सार्थक एवं उचित है।

पाठ की पूरी व्याख्या के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें-

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